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अकेली औरत के हज पर जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच बोल रहे हैं या असदुद्दीन ओवैसी, जानिये क्या है सच

हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम्यूनिकेटर तो हैं. लेकिन यह बात ज़रूरी नहीं है कि वह हर बात को सही से कम्यूनिकेट करते हों.

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मुस्लिम औरतों को बगैर महरम हज पर जाने की छूट ‘देने’ के बारे में नरेंद्र मोदी का बयान भी ऐसा ही है. इस्लाम में महरम का मतलब गार्डियन है. जैसे आपके स्कूल-कॉलेज में होता है. एक मुस्लिम औरत का महरम या तो उसका पति होता है, या फिर ऐसा बालिग लड़का/आदमी जिससे उसका खून का रिश्ता हो.

31 दिसंबर, 2017 को अपने ‘मन की बात’ कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोल गए कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को उन्होंने सुझाव दिया है कि वो यह सुनिश्चित करें कि ऐसी सभी महिलाओं को हज जाने की अनुमति मिले जो अकेले आवेदन कर रही हैं, साथ ही उन्हें स्पेशल श्रेणी में अवसर दिया जाए. इसका मतलब ये निकला कि पहले औरतें बिना महरम हज पर नहीं जा सकती थीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के अगले ही दिन कांग्रेस नेता शकील अगमद ने ट्वीट कर के कहा कि महरम वाला नियम तो सउदी सरकार ने बदला है, तो क्रेडिट मोदी जी ने कैसे ले लिया. असदुद्दीन औवेसी ने भी यही बात कही. तो सच बोल कौन रहा है. प्रधानमंत्री मोदी या फिर शकील-औवेसी?

वो नियम जिसके लिए बयानबज़ी हो रही थी…
भारत के नागरिक हज पर यूं ही नहीं जा सकते. आपको आवेदन देना होता है. वो स्वीकार हुआ तभी आप हज पर जा सकते हैं. अब तक हज कमिटी ऑफ इंडिया का ये नियम था कि हज पर जाने वाली महिलाओं के साथ एक महरम ज़रूर होना चाहिए. हज के लिए एप्लिकेशन में महरम और उससे रिश्ता लिखना होता था.

असल नियम किसका था ये और किसने बदला?
काबा सउदी अरब में है. तो हज पर ‘क्या करें न करें’ वाले नियम वही बनाता है. इन नियमों के मुताबिक कोई अकेली औरत हज नहीं कर सकती थी. फिर 2014 में सउदी सरकार ने इस नियम को थोड़ा ढीला किया. कहा कि 45 साल से ज़्यादा उम्र वाली औरतें बिना महरम के भी हज कर सकती हैं, बशर्ते उनके महरम इजाज़त दें और 4-5 औरतें एक ग्रुप बनाकर आएं.

तो फिर मोदी सरकार ने क्या किया?
हज कमिटी ऑफ इंडिया आवेदन लेते हुए उन्हीं सब नियमों का पालन करती है, जो सउदी सरकार के बनाए होते हैं. तो महरम वाला नियम भी लागू था. तब भी, जबकि मूल नियम सउदी सरकार बदल चुकी थी.

फिर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पैनल बनाया जिसे 2018-22 के लिए हज पॉलिसी बनानी थी. इस पैनल ने सरकार से अपनी सिफारिश में कहा कि 45 साल से ऊपर की औरतों को बिना महरम हज पर जाने देना चाहिए, बशर्ते वो 4-5 के ग्रुप में जाएं. सरकार ने इस सिफारिश को माना है. बस. अब प्रधानमंत्री ही बता सकते हैं कि वो क्यों बोल गए कि उन्होंने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से नियम बदलने को कहा था.

औरतें हमेशा से बिना महरम हज पर जाती रही हैं
ऐसा नहीं है कि प्रधानमंत्री के नियम बदलने से पहले कोई औरत बिना महरम हज पर नहीं गई. भारत के 1,70000 कोटे में से लगभग 45 हज़ार लोग प्राइवेट टूर ऑपरेटर के ज़रिए हज पर जाते हैं. ये प्राइवेट टूर ऑपरेटर 2014 के बाद से औरतों को बिना महरम हज पर ले जाते रहे हैं. 1997 में प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स के आने से पहले भी औरतें ग्रुप बनाकर हज पर जाती रही हैं. कभी ये हज पर जा रहे किसी बड़े दल में शामिल हो जाती थीं तो कभी किसी अंजान को कागज़ पर महरम बता देती थीं.

तो कुल जमा बात ये कि 45 साल से ज़्यादा की उम्र की औरतें हमेशा से बिना महरम के हज करती रही हैं. जो रोक लगी थी, वो सउदी सरकार का नियम था और उसी ने उसे बदला भी. भारत सरकार ने उन नियमों को बस अपने यहां लागू किया, वो भी तीन साल की देरी से. इसका फायदा भी सिर्फ उन औरतों को मिलेगा जो हज कमेटी की ज़रिए हज पर जाएंगी. अब प्रधानमंत्री ने मन की बात में जो कहा वो क्यों कहा, उनका मन ही जानता है.

चलते-चलते एक कायदे की बात और जान लीजिए. वो ये कि ये महरम वाला कानून आया कहां से –
ख्यात इतिहासकार राणा सफवी ने अंग्रेज़ी वेबसाइट डेली ओ में लिखे एक लेख में विस्तार से बताया है कि हज जाने वाली महिलाओं के साथ महरम होने की शर्त इस्लाम में अनिवार्य नहीं है. वो बताती हैं,

”कुरान में लगभग 25 ऐसी आयते हैं जो बताती हैं कि हज के दौरान क्या सही है और क्या नहीं. इनमें से एक में भी ये नहीं लिखा है कि हज जाने वाली औरत के साथ कोई महरम हो. महरम वाली शर्त सउदी अरब के कानून में है. अब चूंकि काबा सउदी अरब में है, तो वहां जाने के लिए आपको उस देश के नियम मानने पड़ते हैं.”

कुछ लोग महरम वाली शर्त को हदीस का हिस्सा बताते हैं. लेकिन हदीस का संकलन मुहम्मद साहब के समय में हुआ था. तब मक्का का रास्ता सूने रेगिस्तान से होकर गुज़रता था और वहां चोर-डाकुओं का खतरा था. अब स्थितियां बदल गई हैं. 14वीं सदी में हुए मुस्लिम विचारक इब्न मुफलिह ने भी कहा था कि मुस्लिम औरतें बिना महरम के हज पर जा सकती हैं, बशर्ते वो सुरक्षित हों.

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