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भारतीय युवतियों ने गाड़े अमेरिकी सेना में झंडे

अल्मोड़ा: अमेरिका के आईटी और राजनीतिक जगत में भारतीयों के जलवे के बारे में तो आपने सुना ही होगा लेकिन आपको यह जानकर अच्छा लगेगा कि, अमेरिकन सेना में भी भारतीयों ने झंडे गाड़े हैं। ऐसी ही हैं पंजाब के ये दो बहनें जो आज अमेरिकन सेना में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। बलरीत कौर यूएस आर्मी में स्टाफ सार्जेंट और तेज तर्रार कमांडो में के तौर पर गिनी जाती है और एक दशक पूर्व इराक ऑपरेशन में हिस्सा लेने वाली भारतीय मूल की अकेली अमेरिकी महिला सैनिक हैं।

बलरीत भले ही यूएस आर्मी से जुड़ चुकी हैं पर उनका दिल आज भी भारत में ही बसता है। इंडो अमेरिकन संयुक्त सैन्य युद्ध अभ्यास के बहाने ही सही बलरीत तीसरी बार भारत आयी हैं। 80 के दशक में आतंकवाद के दौर में चंडीगढ़ निवासी खैरा परिवार को देश छोड़ना पड़ा था। रिश्तेदारों के कहने पर वह पहले तो हांगकांग में बसे। हालात शांत हुए तो देश वापस लौटे। 29 नवंबर 1988 को व्यवसायी पिता सुरजीत सिंह खैरा व गृहणी माता सुखपाल खैरा के घर जन्मी बलरीत ने सातवीं तक की पढ़ाई चंडीगढ़ में ही की। मेडिकल की शौकीन बलरीत को पढ़ाई के लिये माता पिता ने 2001 में रिश्तेदारों के पास अमेरिका भेज दिया। इसी दौरान बलरीत 2006 में यूएस आर्मी में भर्ती हुई और अमेरिकी फौज में उन्होंने अपना मुकाम हासिल किया। ठीक एक साल बाद वर्ष 2007 व 2009 में बलरीत को अमेरिकी इंफेंट्री यूनिट ने विशेष ऑपरेशन के तहत उसे इराक भेजा। जहां उन्होंने अमेंरिका की तरफ से अकेली महिला कमांडो के रूप में कार्य किया। बलरीत इससे पहले दो बार सैन्याभ्यास के लिए भारत आ चुकी हैं।

इस बार फिर रानीखेत के चौबटिया (उत्तराखंड) में उन्हें अपने हमवतन फौजियों क साथ संयुक्त सैन्य युद्ध अभ्यास में दमखम दिखाने का मौका मिला है। यूएस आर्मी में लेफ्टिनेंट बलरीत की बड़ी बहन जसमीत खैरा 2014 के युद्धाभ्यास में रानीखेत आई थी। लेकिन इस बार किन्हीं कारणों से वह भारत आने में असमर्थ रहीं। अमेरिकन सेना में स्टाफ सार्जेंट बलरीत अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बेहद प्रभावित हैं। रानीखेत में मीडिया से बातचीत में बलरीत ने कहा कि, यूएस आर्मी जब ज्वायन की तब मात्र सात भारतीय मूल के सैनिक थे। आज अमेरिकी सेना में 105 भारतीय महिला-पुरुष सैनिक हैं। जहां तक लड़कियों का सवाल है, हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि, भारत को भी अमेरिका व अन्य देशों की तरह अपनी सेना में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को भर्ती करना चाहिये। इससे सेना की शान बढ़ती है। जसमीत व बलरीत खैरा के साथ ही पंजाब के गुरप्रीत सिंह गिल भी यूएस आर्मी के फूर्तीले जांबाजों में है। उन्हें कारगिल युद्ध ने सेना में जाने की प्रेरणा दी। लेकिन संयोग से वह भारत के बजाय अमेरिकी सेना में भर्ती हुए। स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया से सेवानिवृत्त बलवीर सिंह गिल व केंद्रीय विद्यालय जयपुर में शिक्षिका माता गुरमेल सिंह के बेटे गुरप्रीत का जन्म 26 नवंबर 1986 को हुआ। गुरप्रीत ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई जयपुर से ही की। 2008 में कोटा से बीटेक करने के बाद उन्हें एक कंपनी ने टूर पर शिकागो भेजा। ऑनलाइन सर्च के जरिये अमेरिका में भर्ती की जानकारी मिली। जिसके पश्चात् गुरप्रीत ने जॉर्जिया में सेना भर्ती में हिस्सा लिया। सितंबर 2014 में गुरप्रीत ने अमेरिकी सेना ज्वाइन की। जबकि उनका बड़ा भाई बलप्रीत सिंह कनाडा में रियल एस्टेट का कारोबार में है।

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