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जानिये आखिर 2014 के बाद कितने हुए उपचुनाव और कितने में हारी बीजेपी, हैरान कर देने वाले आंकड़े

नई दिल्ली: हम आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के कैराना और नूरपुर समेत अलग-अलग राज्यों की चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम आ चुके हैं। हम आपको यह भी बता दें कि लोकसभा की जिन सीटों पर उपचुनाव हुए थे, उनमें यूपी की चर्चित कैराना लोकसभा सीट के अलावा महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया व पालघर और नागालैंड की एक लोकसभा सीट शामिल है।

bjp loses 19 seats after 2014 elections उपचुनाव

इनके अलावा नूरपुर (यूपी), पलुस कादेगांव (महाराष्ट्र), जोकीहाट (बिहार), गोमिया और सिल्ली (झारखंड), चेंगानूर (केरल), अंपाती (मेघालय), शाहकोट (पंजाब), थराली (उत्तराखंड) और मेहेशतला (पश्चिम बंगाल) विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इन सीटों में से भाजपा को थराली विधानसभा सीट और पालघर लोकसभा सीट पर ही जीत मिली।

अगर उपचुनावों की बात करें तो भाजपा को इन चुनाव परिणामों ने काफी निराश किया है। 2014 में सत्ता में आने के बाद से अभी तक हुए उपचुनावों में भाजपा ने 23 में से सिर्फ 4 ही सीटें पर ही जीत हासिल की है। लेकिन मुख्य चुनाव में भाजपा ने कई राज्यों में जीत हासिल कर सरकार भी बनाई है। 2018 के इन उपचुनावों में यूपी में भाजपा को बड़ा झटका लगा है।

पहले फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में भाजपा को बसपा-सपा गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, इसके बाद अब कैराना में मिली 55 हजार वोटों की हार ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं तो विपक्ष के हौसले बुलंद हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 2019 चुनाव में भाजपा के खिलाफ विपक्ष लामबंद होकर चुनाव लड़ सकता है जोकि बीजेपी के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।

उपचुनाव में बीजेपी का रहा है निराशाजनक प्रदर्शन

Image result for narendra modi and amit shah

हालांकि कैराना को 2019 लोकसभा से पहले लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा था। विपक्षी दलों को उपचुनावों में मिली ये जीत बीजेपी के लिए 2019 लोकसभा चुनाव में कितनी बड़ी चुनौती पेश करेगी, ये देखना दिलचस्प होगा। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा ने 2014 के बाद से केवल 4 सीटों पर ही जीत हासिल की है।

2014 उपचुनाव

महाराष्ट्र की बीड़ सीट भाजपा ने 2014 उपचुनाव में जीती जो कि उपचुनाव के पहले भी भाजपा के पास ही थी। गुजरात की वडोदरा सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की, उपचुनाव के पहले भी भाजपा के पास ही थी। मैनपुरी उपचुनाव में सपा को जीत मिली थी। बीजू जनता दल ने कंधमाल, ओडिशा की सीट पर जीत दर्ज की थी। मेढ़क, तेलंगाना की सीट टीआरएस के खाते में गई थी।

बीजेपी ने 4 तो कांग्रेस ने जीती 5 सीटें

2015 उपचुनाव

रतलाम, मध्य प्रदेश की सीट भाजपा के पास थी लेकिन कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत हासिल की थी। वारंगल, तेलंगाना की सीट टीआरएस को जबकि बनगांव, पश्चिम बंगाल की सीट एआइटीसी के खाते में गई थी।

2016 उपचुनाव

लखीमपुर, असम में भाजपा ने अपनी सीट बचा ली थी। शहडोल, मध्य प्रदेश में भी भाजपा अपनी सीट बचाने में कामयाब रही थी। कुच बिहार और तमलुक में पश्चिम बंगाल की सीट एआइटीसी बचाने में सफल रही थी। तो तुरा, मेघालय में एनपीपी ने अपनी सीट बचा ली थी।

2017 उपचुनाव

पंजाब की अमृतसर सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा था। जबकि गुरदासपुर में भाजपा कांग्रेस के हाथों सीट हार गई थी। श्रीनगर में पीडीपी को हराकर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सीट जीत ली थी। केरल के मल्लापुरम सीट पर आइयूएमएल ने अपना कब्जा जमाए रखा था।

2018 उपचुनाव

राजस्थान की अलवर और अजमेर सीट पर भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार झेलनी पड़ी थी। पश्चिम बंगाल की उलुबेरिया सीट एआइटीसी के पास रही थी। यूपी की गोरखपुर सीट और फूलपुर सीट पर सपा ने जीत दर्ज की थी। ये दोनों सीटें क्रमश: सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। बिहार की अररिया सीट पर आरजेडी ने अपना दबदबा कायम रहा था।

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